
साफ में देखा जा सकता है कि जिस भवन को सुविधा और स्वच्छता के लिए बनाया गया था, उसके चारों ओर स्कूल और स्कूल का साम्राज्य है। शौचालय के अंदर न पानी की व्यवस्था है और न ही सफाई की। आलम यह है कि चारों ओर से पसरी गंदगी और दुर्गंध के कारण ग्रामीण इसके पास से भी गुजरते हैं। मजबूर महिलाएं और बुजुर्ग आज भी खुले में शौच के लिए जाते हैं। अधिकारियों की शैलियाँ पर सवाल उठता है कि वे कई बार इस नरक के बारे , सचिव और सहायक सचिव सरपंच को संबोधित करते हैं, लेकिन सत्य के पागलपन की जिम्मेदारी इस ओर ध्यान देना समझ में नहीं आ रही है।
